Saturday, February 23, 2008

समाज विकास (अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन) की सूचना के निहितार्थ.

समर्थन के लिए सभी ब्लोगर बंधुओं को धन्यवाद.
मेरी कल की पोस्ट "घूस देकर सब मैनेज करते हैं मारवाड़ी " पर अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा जो कुछ कहा गया उसके जवाब मे कुछ कहना चाहूँगा. पहले आप सब उनकी ये टिपण्णी देखें.

समाज विकास said...
सम्मेलन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ती:

पश्चिम बंगाल के भूमि सुधार मंत्री श्री अब्दूल रज्जाक मौल्ला की कथित टिप्पणी के विषय में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष श्री सीताराम शर्मा ने मंत्री श्री मौल्ला से मालदह में फोन पर बातचीत कर अपना असंतोष एवं प्रतिवाद ज्ञापित किया। श्री मौल्ला ने उन्हें स्पष्ट किया कि उनकी कथित टिप्पणी को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। श्री मौल्ला ने अपने वक्तव्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने यह कहा था मारवाड़ी समुदाय मुख्यतः व्यवसाय में है अपने व्यवसाय को अच्छा ‘‘मैनेज’’ करना जानते हैं। श्री मौल्ला ने कहा इस ‘‘मैनेज’’ ‘शब्द को मीडिया द्वारा गलत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। श्री मौल्ला ने श्री शर्मा से कहा कि वे मारवाड़ी समाज सहित सभी समाज की इज्जत करते हैं एवं जातिगत तथा साम्प्रदायिक आधारित टिप्पणी में विश्वास नहीं करते । उन्होंने कहा कि मेरा अभिप्राय मारवाड़ी समाज की भावना को ठेस पहुँचाना कतई नहीं था।

अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन, मंत्री महोदय के स्पष्टीकरण पर संतोष व्यक्त करते हुए ऐसे संवेदनशील विषय पर मंत्रियों द्वारा टिप्पणी में संयम एवं सावधानी बरतने की अपील करती है। सम्मेलन मारवाड़ी समाज से भी मंत्री महोदय के स्पष्टीकरण एवं ठेस नहीं पहुंचाने के वक्तव्य को सही भावना के साथ लेने की अपील करता है।

-शम्भु चौधरी (सहयोगी संपादक, समाज विकास),
दिनांक : 22.02.2008

सम्मेलन को कोटी-कोटी धन्यवाद.लेकिन एक बात आप सबकी नज़र मे लाना चाहता हूँ कि रज्जाक साहब इस मामले मे सफ़ेद झूठ बोल रहे है. उनके कथित भाषण की सीडी "प्रभात खबर - कोलकत्ता कार्यालय" मे उपलब्ध है. आप अवलोकन कर सकते हैं.
दूसरी बात जब से उनका ये बयान आया है एक-एक वाम पंथी नेता ये कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे है कि उनके इस बयान से पार्टी का कोई लेना देना नहीं है. कल तो मुख्यमंत्री माननीय बुद्धदेव जी ने माफ़ी भी मांगी है.

मेरे इस स्पष्टीकरण का मकसद केवल इतना है कि " जब किसी की अस्मिता और अस्तित्व का सवाल हो इतनी उदारता अच्छी नही होती"
बाकी आप लोग सब गुणी और प्रतिष्टित व्यक्ति है. आप ज्यादा समझतें है.

6 comments:

Gyandutt Pandey said...

सन्तोष है कि उन्होनें अपनी थूक को चाट लिया है।

Shiv Kumar Mishra said...

रज्जाक मोल्ला साहब को 'ग़लत कोट' किया गया है भाई. जितने बड़े-बड़े नेता होते हैं, सबको जब ग़लत कोट कर दिया जाता है तो वे प्रसिद्धि को प्राप्त हो जाते हैं. मोल्ला साहब ने सही रास्ता चुना है....:-)

नीरज गोस्वामी said...

ज्ञान भईया ठीक ही कह रहे हैं...अगर कोई थूक के चाट ही ले तो फ़िर उसका आप क्या कीजियेगा?
नीरज

दिनेशराय द्विवेदी said...

बाल किशन जी जब पानी एक जगह रुक जाता है तो सड़ने लगता है। गंगाजल को तालाब में रोक कर देख लो। बंगाल का वामपंथ अब नाम भर को रह गया है और एक ही जगह कदमताल कर रहा है। उस में सड़न बहुत पहले ही शुरू हो चुकी थी। लेकिन इस का अर्थ यह नहीं कि दक्षिणपंथ अच्छा है। वास्तविकता तो यह है कि हर प्रगतिशील ताकत समय के साथ यथास्थिति वादी और देर सबेर दक्षिणपंथी हो जाती है। आगे बढ़ने के लिए जनता में से ही नयी शक्तियां जन्म लेंगी, वे जनम ले रही है और लेती रहेंगी समय उन्हे एक मंच पर एकत्र भी करेगा। तभी कोई बड़ा गुणात्मक परिवर्तन संभव है।

रवीन्द्र प्रभात said...

इस सन्दर्भ में मैं ज्ञान जी से पूरी तरह सहमत हूँ कि -उन्होनें अपनी थूक को चाट लिया है।

समाज विकास said...

आदरणीय बाल किशन जी, नमस्कार,
आपकी टिप्पणी देखी। मुझे खुशी है कि समाज में आप जैसे जागरूक युवक भी हैं। कल आपका लेख सुबह ही पढ़ा था, काफी अच्छा लगा। आपने जो बातें अपनी टिप्पणी में कही वे सभी बातें कल के प्रभात खबर में और शाम को श्री प्रकाश चण्डालिया जी के "राष्ट्रीय महानगर" में आ चुकी है, यह सब बातें जानकारी में हैं, वैसे आपकी जानकारी के लिये यह बात लिख रहा हूँ परसों शाम को NDTV में प्रकाश जी ने अपना बयान देने से पूर्व हमलोगों से सलाह कर ली थी कि मीडिया में क्या और कितना कहना उचित रहेगा।
राज्य के मुख्यमंत्री से श्री दिनेश बजाज मिलकर भी आये, विमान बोस तो इस तरह के भडकाऊ बयान से काफी खफ़ा दिखे। श्रीमती सरला माहेश्वरी ने काफ़ी सतर्कता दिखाई। असम, दिल्ली, दुर्गापुर,महाराष्ट्र से फोन भी आये। फारवार्ड ब्लाक, बामदल, सभी साथ खड़े थे,जब यह चाहेते थे कि इस बात को समाप्त किया जाना चाहिये। यह हमारे बंगाल की संस्कृति नहीं रही है। आपकी सब बातें सही है। परन्तु जब किसी संस्था से कोई परिपत्र जारी किया जाता है, तो उसके पीछे बहुत सारे लोग काम करते हैं। आशा है आप हमसे सहमत होंगे। आपका ही - शम्भु चौधरी
www.samajvikas.in