Thursday, December 6, 2007

सेलिब्रिटी और दीपक

बहुत दिनों से कुछ नही लिख पाया. ऊपर से मैं ठहरा नया ब्लागिया. लिहाजा नए ब्लागिये का धर्म निभाते हुए दुःख मिश्रित चिंता मे डूबा हुआ था कि मित्र दीपक का आगमन हुआ. दीपक के बारे में बताने लायक सबसे जरूरी बात ये है कि मेरा ये मित्र बहुत नाराज़ किस्म का प्राणी है. हर समय, हर परिस्थति मे, हर इंसान से नाराज़ रहता है. किसी की भी बखिया उधेड़नी हो तो बस उसका नाम भर दीपक के सामने लेने कि जरुरत है. बाकी का काम दीपक स्वयं कर लेने में सक्षम है. कुल मिलाकर परसाई जी के निबंध 'निन्दारस' में वर्णित पात्र की तरह. जिस भूमिका का निर्वाह निंदक करता है वही भूमिका दीपक की है. दीपक से मिलने पर मुझे बहुत सुख मिलता है. जिनसे भी मुझे हिसाब बराबर करना रहता है मैं उनके नाम एक-एक कर दीपक के आगे सरकाता जाता हूँ और बाकी सब दीपक के जिम्मे.

आते ही उसने ही उसने प्रश्न की तोप दागी. " क्या बात है? क्यों परेशान हो? क्या तबियत ख़राब है?"

मैंने कहा "नही यार, बहुत दिनों से अपने ब्लॉग पर कुछ लिख नही पाया और दूसरों के ब्लॉग पर टिप्पणी भी नही कर पाया हूँ. इसलिए अच्छा नही लग रहा है."

इतना सुनते ही दीपक ने अगला प्रश्न मेरी तरफ़ सरकाया;" क्या होगा लिखकर?"

"विशेष कुछ नही पर अच्छा लगता है. सुख मिलता है ये देखकर कि मेरा लिखा भी लोग पढ़ते है. मेरा नाम भी ब्लागवानी, नारद और चिटठाजगत पर आता है. लोग मुझे भी जानने लगे हैं. और फिर, पुरूष के भाग्य के बारे में कोई नहीं जानता. हो सकता है बाद में मेरे भी लेख और कवितायें पात्र-पत्रिकाओं वगैरह में छपें"; मैंने उसे बताया. इतना सुनते ही वो फट पड़ा " तो ऐसा बोलो न कि सेलिब्रिटी बनने का चस्का चढा है."

मैंने कहा; "नहीं, सेलेब्रिटी बनने की बात नहीं है. बहुत सारे लोग लिखते हैं, सो मैं भी लिख लेता हूँ."

"नहीं-नहीं, मैं समझ गया बॉस. पूरा मामला ही सेलेब्रिटी बनने का है. तुम नहीं मानोगे, लेकिन एक बात मेरी गाँठ बाँध लो, ये सेलेब्रिटी बनने का काम तुम्हारे बस का नहीं"; दीपक ने मुझे सूचना दी.

मैंने घबराते हुए पूछा " क्यों भला?"

उसने कहा ये बताओ " क्या तुम्हारी पत्नी या होने वाली पत्नी से तुम्हारा तलाक हुआ है?"

मैंने कहा " नही भाई, मैं तो अपनी पत्नी के सारी बातें दोनों कान खोलकर सुनता हूँ. और उसका कहा भी जल्द से जल्द पूरा करता हूँ. मैं तो पूरी तरह से विशुद्ध पत्नीब्रता इंसान हूँ. फ़िर मेरा तलाक़ क्यों होने लगा."

उसने फ़िर पूछा " अच्छा ये बताओ क्या कभी किसी गैर औरत ने तुम पर अपने बच्चे या होने वाले बच्चे के पिता होने का इल्जाम लगाया है?"

मैंने घबराते हुए जवाब दिया " नही भाई नही. तुम क्यों मेरे सुखी संसार मे आग लगाना चाहते हो."

इस बार उसका प्रश्न था " क्या तुमने कभी अपनी गाड़ी या मोटर साइकिल के नीचे फुटपाथ पर सोये गरीबों को कुचला है?

"नही यार, कुचलने का प्रश्न तो तब आएगा जब ये चीजें होगी मेरे पास" मेरा जवाब था.

"तुम्हारा कभी किसी मैगजीन मे कोई सेक्सी फोटो छपा या कोई सेक्सी विडियो एलबम निकला?" उसका नया प्रश्न.

मैंने अगल बगल देखते हुए धीरे से कहा " अभी तक तो नही पर तुम्हारी कोई पहचान वाला है तो बताओ ना"

उसने कहा "जरुर बताऊंगा पर तुम ये बताओ क्या तुम्हारे घर पर कोई सरकारी छापा पड़ा जिसमे ८-१० करोड़ के जेवर और नगद बरामद हुए?"

मैंने जवाब दिया "नही भाई पर चाहता तो मैं भी हूँ कि एक बार छपा पड़े ये सब बरामद हो ही जाए फ़िर तो सब टैक्स वगैरह काट कर ३०-४०
प्रतिशत तो मुझे भी मिल ही जायेंगे. फिलहाल तो मुझे स्वयं ही नही पता है कि इतना कुछ मेरे घर मे रखा कंहा है?"

तोप से एक नया प्रश्न निकला " कभी काला हिरन मारा? कभी ऐ के 47 बरामद हुई तुम्हारे पास से?

"आज तक जीवन मे दोनों ही चीजों के दर्शन भी नही हुए मुझे और क्या कहूं." मैंने जवाब दिया.

"अपने आप को लेखक, कवि, ब्लोगियर और ना जाने क्या-क्या समझते हो पर ये बताओ तुम्हारा लिखा कंही बैन हुआ? कभी तुम्हारे लिखे पर कोई झमेला शुरू हुआ?" उसने पूछा.

मैंने कहा "झमेला और बैन शुरू होने के आसार तो तब बनेंगे जब लोग पढेंगे अभी तो मुझे बहुत लोग पढ़ते ही नही है."

उसने फ़ैसला सुनाया " जब सब जवाब तुम्हारे नही है तो सेलिब्रिटी बनना क्या खाक सही है, छोडो ये सब कुछ काम पर ध्यान दो तो शायद इनमे से कुछ हासिल हो भी जाए."

इस बार मैंने मन ही मन सोचा (सामने कहने की हिम्मत तो मुझमे नही थी) कि " तुम तो लेखक, कवि या फ़िर ब्लागिये नही हो, तुमने कौन सा तीर मार लिया"

दीपक द्वारा लिए गए मेरे इस इंटरव्यू से मुझे दो फायदे जरुर हुए. एक तो नई पोस्ट का सामान मिल गया दूजे सेलिब्रिटी बनने का नशा उतर
गया. मैंने उसे दिल से धन्यवाद दिया.

13 comments:

Shiv Kumar Mishra said...

वाह..वाह..

दीपक जैसे लोगों की वजह से पोस्ट लिखने का मुद्दा भी मिलता है...स्वागत है, इतने दिनों बाद पोस्ट लिखने पर..
ये दीपक के बारे में और कुछ लिखो, अच्छा लगेगा...

Gyandutt Pandey said...

एक तो नई पोस्ट का सामान मिल गया दूजे सेलिब्रिटी बनने का नशा उतर गया।
**************************
१. नशा उतर गया तो चलो दनादन्न टिप्पणियों में इन्वेस्टमेण्ट करना प्रारम्भ करो।
२. ये दीपक जी कहां होते हैं। काम के मनई हैं। इनका भी एक ब्लॉग बनवा दिया जाये! :-)

mamta said...

कमाल के है आप और आपके दीपक जी।

चले अब तो पता चल गया ना की आप ब्लॉगिंग कर सकते है। :)

Sanjeet Tripathi said...

ऐसे लोग और मिलते रहें और लिखने का मसाला मिलता रहे!!

प्रभो बालकिशन जी, तीन महीने हो गए आपको ब्लॉगजगत में, कब तक अपने को नया ब्लॉगर कहते हुए बालक बने रहेंगे [ दर-असल बालक बने रहना हमारा अधिकार है ;) ]

तीन महीने हो गए आपको आए और अगले तीन महीने बाद तो आप तब के नवांगतुक ब्लॉगर्स द्वारा वरिष्ठ ब्लॉगर कहलाओगे!

अब रोजाना ही इतने नए ब्लॉग्स आ रहे हैं कि नवजात बने रहने की समय सीमा बहुत थोड़ी हो गई है ;)

Kakesh said...

छा गये जी तुसी.

anuradha srivastav said...

मजेदार..........

शैल छाया said...

सुंदर इंटरव्यू.. हमारा भी ज्ञान वर्धन हुआ है जी.

पुनीत ओमर said...

वैसे इनमे से जितने सवाल आपसे पूछे गए, अगर मुझसे पूछे जाते तो मेरा भी जवाब ना ही होता एक आध को छोड़ कर. पर आपने बातों ही बातों मी सरे के सरे ब्लोगेर्स को एकदम ही निकम्मा बना दिया. ये तो अच्छी बात नहीं न. पर जो भी हो, लिखा एकदम झकास. दीपक जी(अगर काल्पनिक पात्र ना हो to) को मेरी तरफ़ से शुभकामनाये दीजियेगा.

नीरज गोस्वामी said...

देर आए दुरुस्त आए हम तो कब से खोज रहे थे आप को और आपकी पोस्ट को अब जा के मिली है.ये दीपक टाइप लोग होते ही ऐसे हैं अपने नीचे अँधेरा रखते हैं और दूजे का घर जलाते हैं.लगता है सेलिब्रेतियों से खासी नफरत है इनको. खूब खींच खींच के तीर मारे हैं. आप और हम साथ साथ ही ब्लॉग लिखना शुरू किए हैं और देखिये आप के प्रशंषकों की क्या वृद्धि हुई है आप के मुहं से ये कहना की आप नौसीखिये या नए हैं शोभा नहीं देता.ये विशेषण आप हमारे लिए रहने दें तो ही ठीक hai.
आप जब जब पोस्ट लिखे हैं हम तब तब तिप्पन्नी किए हैं इसलिए आप द्वारा लगाया आरोप निराधार है.अपने शब्द वापस लीजिये और तिप्पन्नी वहीं छोड़ दीजिये.
नीरज

अनिल रघुराज said...

सेलेब्रिटीज पर अच्छा व्यंग्य है। वैसे, गंभीरता से कहूं तो काम करते जाइए. प्रसिद्धि तो छाया है। अपने आप पीछे-पीछे चली आएगी।

बाल किशन said...

आपलोगों की टिप्पणियां पढ़ कर एक ने उर्जा का संचार अपने आप मे महसूस कर रहा हूँ. खास कर नीरज जी और रघुराजी जी की.
सबको धन्यवाद. जो बाद मे आयेंगे (अगर आये तो) उनका भी.

Sanjay said...

लो हमऊ आ गए. तो नया कब पढ़ाएंगे. मौत ने घर देख लिया है आना जाना लगा रहेगा.

Sanjay said...

भइया बालकिशन क्‍या बात लिखी है ...
''बढती उम्र और बढ़ता पेट, दोनों बहुत दुःख देते हैं. इतने बड़े दुःख के साथ जीने के लिए इंसान के पास लिखने का साधन हो तो याद करके लिख सकता है कि चार साल पहले उम्र कितनी कम थी और पेट कितना कम. ये ब्लॉग उन्ही यादगार पलों के लिए है.''
जियो प्‍यारे भाई. आपका पेट खूब बड़ा हो.. मेरा मतलब है उम्र के साथ साथ...
पर भइया दुखती रग पर हाथ रख दिया.