Wednesday, November 28, 2007

बालकिशन की टिप्पणी पॉलिसी




हिन्दी में भी गेस्ट पोस्ट का चलन शुरू हो गया है। सामुहिक ब्लॉगों से गेस्ट पोस्ट ठेलने की दिशा में चल रहे हैं लोग। लिहाजा मैने भी ज्ञान भैया से एक गेस्ट पोस्ट झटकी है। इसमें विचार उनके पर मेरे नाम से हैं। मामला गड्ड-मड्ड सा है। पर आप पोस्ट पढ़ें -



बालकिशन की टिप्पणी पॉलिसीumbrella

Corporate Concepts बालकिशन मेथॉडिकल ब्लॉगर हैं। बोले तो ब्लॉगिंग में केल्कुलेटेड इनवेस्टर। यह टिप्पणी पॉलिसी उनके ब्लॉग पर टिप्पणी करने/दिखाने/उसके स्वामित्व/उसे उड़ाने से सम्बन्धित नहीं है। उनके ब्लॉग पर टिप्पणी करने के बारे में तो सब खुला खेल फरुख्खाबादी है फिलहाल। पोस्ट अगर राखी सावंत पर हो और आप टिप्पणी टुनटुन या मुकरी या कच्छ के रन में पाये जाने वाले गधों के बारे में भी करें तो चलेगा। अभी तो नयी नयी दुकान है - अत: टिप्पणी होनी चाहिये बस।

यह टिप्पणी पॉलिसी बालकिशन द्वारा की जाने वाली टिप्पणियों के विषय में है। मेथॉडिकल तरीके से यह बिन्दुवार स्पष्ट की जा रही है -

  1. ब्लॉगों को तीन मुख्य केटेगरीज में बांटा जाये - ब्ल्यू-चिप, मिडकैप और स्माल कैप। यह केटेगरियां प्रतिमाह रिव्यू की जायें।
  2. अपनी टिप्पणियों का इंवेस्टमेण्ट अनुपात तय कर ब्ल्यू-चिप, मिडकैप और स्माल कैप ब्लॉग्स पर टिप्पणी को रेशनलाइज किया जाये। यह इंवेस्टमेण्ट किसी एक के पक्ष में झुका हुआ न रहे।
  3. इंवेस्टमेण्ट के रिटर्न मॉनीटर किये जायें। जिस स्टॉक (सॉरी, ब्लॉग) से रिटर्न न मिल रहे हों, उनपर स्टॉप-लॉस की लिमिट तय की जाये। रिव्यू महीने की बजाय 10 दिन में किया जाये और यह कदापि न माना जाये कि स्टॉक (सॉरी, ब्लॉग) को 2-3 साल के सिनारियो से रखना है। ब्लॉग की हाफ-लाइफ भी आकलित की जाये। वह इसलिये कि कुछ ब्लॉगों की मॉर्टेलिटी रेट बहुत ज्यादा है।
  4. इसके लिये अगर फोकट में ब्लॉग एडवाइजर मिल सकता हो तो उसके ब्लॉग पर मुक्त-हस्त से टिप्पणी कर फीस देने का इंतजाम भी किया जाये। ऐसे दो एक्स्पर्ट शिवकुमार और आलोक अ.ब. पुराणिक हैं। औरों की भी तलाश की जाये।
  5. कुछ टिप्पणियों का प्रतिशत पेनी स्टॉक (सॉरी, ब्लॉग) के लिये रिजर्व कर लिया जाये। इन ब्लॉगों के लिये फीड एग्रेगेटरों के मूवमेण्ट पर नजर रखी जाये। इनसे टिप्पणी रिटर्न अगर अच्छे हों तो इन्हे विश्लेषण के आधार पर मिडकैप और स्माल कैप में वर्गीकृत कर दिया जाये।
  6. इस टिप्पणी पॉलिसी का भी तीन महीने में एक बार रिव्यू किया जाये।

---- ज्ञानदत्त पाण्डेय

(बाल किशन की चहुं ओर की जा रही टिप्पणियों से प्रभावित हो कर यह पोस्ट लिखी गयी है।)


9 comments:

Shiv Kumar Mishra said...

टिपण्णी में निवेश बहुत लाभदायक होता है क्या जी?...नेट रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट कैसा है?..

वैसे आपका पोर्टफोलियो बहुत डाईवेर्सीफाईड है....लगे रहें. लेकिन बीच बीच में ये भी देखते रहें कि जहाँ से इतना रिटर्न आना है, वो आ रहा है कि नहीं.

काकेश said...

ज्ञान जी के साथ रहने से आपभी अब ज्ञान की बातें करने लगें हैं.

हम भी देखिये निवेश कर रहें हैं अब ब्लू चिप है या नहीं यह तो बाद में पता चलेगा.

ALOK PURANIK said...

धांसू च फांसू है जी।

अजित वडनेरकर said...

हमारा भी वही मत है जो काकेश जी का है। (इन दिनों काकेश जी से हमारी राय काफी मिल रही है। )

mahashakti said...

आप टिप्‍पणी वर्षा जारी रखे, आप पर भी वर्षा जारी रहेगी।

महावीर said...

बात तो सही है कि "ब्लॉग की हाफ-लाइफ भी आकलित की जाये। वह इसलिये कि कुछ ब्लॉगों की मॉर्टेलिटी रेट बहुत ज्यादा है।" पर उन ब्लॉगियों का ज़िक्र नहीं किया जो कुछ कारणों से hibernate हो जाते हैं जैसे शीत निष्क्रियता, सामयिक रोग निष्क्रियता, बुढ़ेऊ निष्क्रियता,
आलस-प्रेम निष्क्रियता आदि अनेक कारण हो सकते हैं। वे लोग अधिक नहीं लिख पाते।
ख़ैर, भई जैसे भी हो टिपियाते रहेंगे, और आप भी टिपियाते रहो।

नीरज गोस्वामी said...

इन दिनों देखने में आ रहा है की किसी की पोस्ट में कुछ हो न हो बाल किशन महाराज की टिप्पन्नी ज़रूर रहती है. ब्लोगवानी खोलिए देखिये सिलसिलेवार उनका नाम हर पोस्ट के नीचे झांकता मिलेगा. जिन पोस्ट पर वो टिप्पन्नी नही करते उनके लिखने वालों को लगता है की पोस्ट हटा देने में ही भलाई है. इन टिप्पणियों के चक्कर में वो ख़ुद देखिये कितनी कम पोस्ट लिख रहे हैं.
मेरी आखरी पोस्ट पर उनकी टिप्पन्नी नहीं आयी तभी से सोच में पड़ा हूँ की अगली ग़ज़ल पोस्ट करूँ या नहीं? जहाँ बाल किशन जी न आयें वहाँ और कौन आएगा भाई? बाकि जो इस पोस्ट की सामग्री है वो अपने भेजे में आयी नहीं . अरे जिसने जीवन में एक रुपिया तक इन्वेस्ट न किया हो वो क्या खा के आप की पोस्ट समझेगा.
नीरज

नीरज गोस्वामी said...

इन दिनों देखने में आ रहा है की किसी की पोस्ट में कुछ हो न हो बाल किशन महाराज की टिप्पन्नी ज़रूर रहती है. ब्लोगवानी खोलिए देखिये सिलसिलेवार उनका नाम हर पोस्ट के नीचे झांकता मिलेगा. जिन पोस्ट पर वो टिप्पन्नी नही करते उनके लिखने वालों को लगता है की पोस्ट हटा देने में ही भलाई है. इन टिप्पणियों के चक्कर में वो ख़ुद देखिये कितनी कम पोस्ट लिख रहे हैं.
मेरी आखरी पोस्ट पर उनकी टिप्पन्नी नहीं आयी तभी से सोच में पड़ा हूँ की अगली ग़ज़ल पोस्ट करूँ या नहीं? जहाँ बाल किशन जी न आयें वहाँ और कौन आएगा भाई? बाकि जो इस पोस्ट की सामग्री है वो अपने भेजे में आयी नहीं . अरे जिसने जीवन में एक रुपिया तक इन्वेस्ट न किया हो वो क्या खा के आप की पोस्ट समझेगा.
नीरज

अजित वडनेरकर said...

भाई बालकिशन जी ,
आपका ईमेल आईडी सब दूर तलाश कर लिया । कहां मिलेगा ?